Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.195.49-50: हे भारत! उपर्युक्त वचन कहकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने जल पिया और फिर दिव्य नारायणास्त्र प्रकट किया।   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  7.195.49-50 
तथोक्त्वा द्रोणपुत्रस्तु वार्युपस्पृश्य भारत॥ ४९॥
प्रादुश्चकार तद् दिव्यमस्त्रं नारायणं तदा॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! उपर्युक्त वचन कहकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने जल पिया और फिर दिव्य नारायणास्त्र प्रकट किया।
 
Bhaarat! Having said the aforesaid words, Drona's son Ashwatthama sipped water and then manifested the divine Narayanastra.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि नारायणास्त्रमोक्षपर्वणि अश्वत्थामक्रोधे पञ्चनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत नारायणास्त्रमोक्षपर्वमें अश्वत्थामाका क्रोधविषयक

एक सौ पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)