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mahabharat 7.195.48-49h: मेघों की गम्भीर गर्जना के समान उस गर्जनापूर्ण शब्द को सुनकर महाबली पाण्डव एकत्र होकर गुप्त मंत्रणा करने लगे ॥48 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.195.48-49h 
तं शब्दं पाण्डवा: श्रुत्वा पर्जन्यनिनदोपमम्॥ ४८॥
समेत्य रथिनां श्रेष्ठा: सहिताश्चाप्यमन्त्रयन्।
 
 
अनुवाद
मेघों की गम्भीर गर्जना के समान उस गर्जनापूर्ण शब्द को सुनकर महाबली पाण्डव एकत्र होकर गुप्त मंत्रणा करने लगे ॥48 1/2॥
 
Hearing that thunderous sound like the deep thunder of the clouds, the great Pandavas gathered together and started giving secret advice. 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)