Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.195.47-48h: सब लोग प्रसन्नतापूर्वक युद्ध के तुरहियाँ बजाने लगे, सहस्रों नगाड़े बजाने लगे, घोड़ों की टापों और रथों के पहियों से त्रस्त रणभूमि मानो पीड़ा से चीखने लगी। वह कोलाहलपूर्ण ध्वनि आकाश, अंतरिक्ष और पृथ्वी में गूँजने लगी। | mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भेरीश्चाभ्यहनन् हृष्टा डिण्डिमांश्च सहस्रश:।
तथा ननाद वसुधा खुरनेमिप्रपीडिता॥ ४७॥
स शब्दस्तुमुल: खं द्यां पृथिवीं च व्यनादयत्।
अनुवाद
सब लोग प्रसन्नतापूर्वक युद्ध के तुरहियाँ बजाने लगे, सहस्रों नगाड़े बजाने लगे, घोड़ों की टापों और रथों के पहियों से त्रस्त रणभूमि मानो पीड़ा से चीखने लगी। वह कोलाहलपूर्ण ध्वनि आकाश, अंतरिक्ष और पृथ्वी में गूँजने लगी।
Everyone happily blew the trumpets of war, beat thousands of drums, the battlefield, battered by the hooves of horses and the wheels of chariots, seemed to cry out in pain. That tumultuous sound began to reverberate in the sky, space and the earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥