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mahabharat 7.195.42-43: मैं रणभूमि में इच्छानुसार पत्थरों की वर्षा करूँगा, लोहे की चोंच वाले पक्षियों की सहायता से महाबली योद्धाओं को भगा दूँगा तथा शत्रुओं पर तीक्ष्ण कुल्हाड़ियों की वर्षा भी करूँगा; इसमें संशय नहीं है ॥42-43॥   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  7.195.42-43 
यथेष्टमश्मवर्षेण प्रवर्षिष्ये रणे स्थित:॥ ४२॥
अयोमुखैश्च विहगैर्द्रावयिष्ये महारथान्।
परश्वधांश्च निशितानुत्स्रक्ष्येऽहमसंशयम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मैं रणभूमि में इच्छानुसार पत्थरों की वर्षा करूँगा, लोहे की चोंच वाले पक्षियों की सहायता से महाबली योद्धाओं को भगा दूँगा तथा शत्रुओं पर तीक्ष्ण कुल्हाड़ियों की वर्षा भी करूँगा; इसमें संशय नहीं है ॥42-43॥
 
While in the battlefield, I will rain stones according to my wish, I will drive away the mighty warriors with the help of birds having iron beaks and I will also shower sharp axes on the enemies; there is no doubt about this. ॥ 42-43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)