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श्लोक  7.195.4 
पिता मम यथा क्षुद्रैर्न्यस्तशस्त्रो निपातित:।
धर्मध्वजवता पापं कृतं तद् विदितं मम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मुझे यह ज्ञात हो गया है कि मेरे पिता ने किस प्रकार शरण ली, उन दुष्टों ने उन्हें किस प्रकार मारा तथा धर्म का ढोंग करने वाले युधिष्ठिर ने क्या-क्या पाप किये।
 
O King! I have come to know how my father surrendered, how those wicked people killed him and the sins committed by Yudhishthira who pretended to be religious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)