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mahabharat 7.195.35: ‘प्रभु! यह अस्त्र किसको नहीं मारेगा, यह ज्ञात नहीं है। यह अध्यक को भी मार सकता है; अतः इसका प्रयोग अचानक नहीं करना चाहिए॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.195.35 
न चैतच्छक्यते ज्ञातुं कं न वध्येदिति प्रभो।
अवध्यमपि हन्याद्धि तस्मान्नैतत् प्रयोजयेत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘प्रभु! यह अस्त्र किसको नहीं मारेगा, यह ज्ञात नहीं है। यह अध्यक को भी मार सकता है; अतः इसका प्रयोग अचानक नहीं करना चाहिए॥ 35॥
 
‘Prabhu! It cannot be known whom this weapon will not kill. It can kill even Adhyaka; therefore it should not be used suddenly.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)