Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.195.21-22h: यद्यपि महापुरुष को कभी अपनी प्रशंसा नहीं करनी चाहिए, फिर भी चूँकि मैं अपने पिता का वध सहन नहीं कर सका, इसलिए आज मैं यहाँ अपने पुरुषार्थ का वर्णन कर रहा हूँ॥ 21/2॥ | mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आर्येण हि न वक्तव्या कदाचित् स्तुतिरात्मन:॥ २१॥
पितुर्वधममृष्यंस्तु वक्ष्याम्यद्येह पौरुषम्।
अनुवाद
यद्यपि महापुरुष को कभी अपनी प्रशंसा नहीं करनी चाहिए, फिर भी चूँकि मैं अपने पिता का वध सहन नहीं कर सका, इसलिए आज मैं यहाँ अपने पुरुषार्थ का वर्णन कर रहा हूँ॥ 21/2॥
Although a great man should never praise himself, yet because I could not bear the murder of my father I am describing my efforts here today.॥ 21/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥