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mahabharat 7.195.19-20h: धिक्कार है मेरे दिव्यास्त्रों को! धिक्कार है मेरी इन दोनों भुजाओं को! और धिक्कार है मेरे पराक्रम को!! जब आचार्य द्रोण को मेरे जैसा पुत्र पाकर अपने केश मुंडवाने का अपमान सहना पड़ा॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.195.19-20h 
धिङ्ममास्त्राणि दिव्यानि धिग् बाहू धिक् पराक्रमम्॥ १९॥
यं स्म द्रोण: सुतं प्राप्य केशग्रहमवाप्तवान्।
 
 
अनुवाद
धिक्कार है मेरे दिव्यास्त्रों को! धिक्कार है मेरी इन दोनों भुजाओं को! और धिक्कार है मेरे पराक्रम को!! जब आचार्य द्रोण को मेरे जैसा पुत्र पाकर अपने केश मुंडवाने का अपमान सहना पड़ा॥19 1/2॥
 
Shame on my divine weapons! Shame on these two arms of mine! And shame on my prowess!! When Acharya Drona had to bear the insult of shaving his hair after getting a son like me.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)