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mahabharat 7.195.1: संजय कहते हैं - हे नरश्रेष्ठ! पापी धृष्टद्युम्न ने छल से मेरे पिता को मार डाला है, यह सुनकर अश्वत्थामा की आँखें आँसुओं से भर आईं। फिर वह क्रोध से जल उठा॥1॥   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.195.1 
संजय उवाच
छद्मना निहतं श्रुत्वा पितरं पापकर्मणा।
बाष्पेणापूर्यत द्रौणी रोषेण च नरर्षभ॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे नरश्रेष्ठ! पापी धृष्टद्युम्न ने छल से मेरे पिता को मार डाला है, यह सुनकर अश्वत्थामा की आँखें आँसुओं से भर आईं। फिर वह क्रोध से जल उठा॥1॥
 
Sanjaya says - O best of men! On hearing that the sinner Dhrishtadyumna has killed my father by deceit, Ashwatthama's eyes filled with tears. Then he burned with rage.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)