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mahabharat 7.194.8-10: अस्त्र-शस्त्र विद्या में परशुराम के समान, युद्धकला में इन्द्र के समान, पराक्रम में कृतवीर्यपुत्र अर्जुन के समान, बुद्धि में बृहस्पति के समान, धैर्य और स्थिरता में पर्वत के समान, तेज में अग्नि के समान, गंभीरता में समुद्र के समान तथा क्रोध में विषधर सर्प के समान, युवा अश्वत्थामा संसार का प्रधान सारथि और प्रबल धनुर्धर है। उसने श्रम और थकान पर विजय प्राप्त कर ली है। युद्ध में वह वायु के समान वेगवान और क्रोध में भरे हुए यमराज के समान भयंकर है। 8-10॥   |   mahabharat अध्याय 7.194: धृतराष्ट्रका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 194: धृतराष्ट्रका प्रश्न  »  श्लोक 8-10
 
 
श्लोक  7.194.8-10 
रामस्य तु सम: शस्त्रे पुरंदरसमो युधि।
कार्तवीर्यसमो वीर्ये बृहस्पतिसमो मतौ॥ ८॥
महीधरसम: स्थैर्ये तेजसाग्निसमो युवा।
समुद्र इव गाम्भीर्ये क्रोधे चाशीविषोपम:॥ ९॥
स रथी प्रथमो लोके दृढधन्वा जितक्लम:।
शीघ्रोऽनिल इवाक्रन्दे चरन् क्रुद्ध इवान्तक:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अस्त्र-शस्त्र विद्या में परशुराम के समान, युद्धकला में इन्द्र के समान, पराक्रम में कृतवीर्यपुत्र अर्जुन के समान, बुद्धि में बृहस्पति के समान, धैर्य और स्थिरता में पर्वत के समान, तेज में अग्नि के समान, गंभीरता में समुद्र के समान तथा क्रोध में विषधर सर्प के समान, युवा अश्वत्थामा संसार का प्रधान सारथि और प्रबल धनुर्धर है। उसने श्रम और थकान पर विजय प्राप्त कर ली है। युद्ध में वह वायु के समान वेगवान और क्रोध में भरे हुए यमराज के समान भयंकर है। 8-10॥
 
In the knowledge of weapons, equal to Parashurama, in the art of war, equal to Indra, in prowess equal to Kritavirya's son Arjun, in intelligence equal to Jupiter, in stability and patience equal to a mountain, in brightness equal to fire, in seriousness like the ocean and in anger like a poisonous snake, young Ashwatthama is the chief charioteer and strong archer of the world. He has conquered labor and fatigue. In battle, he moves as fast as the wind and is as fierce as Yamraj, filled with anger. 8-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)