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mahabharat 7.193.62: अपने दिव्य रूप मृत्युरूप धृष्टद्युम्न को अपने सम्मुख देखकर लोकतत्त्व के ज्ञान में निपुण आचार्य ने अपने दिव्यास्त्रों का परित्याग कर दिया और आमरण व्रत का नियम लेकर युद्धभूमि में बैठ गए ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  7.193.62 
तं दृष्ट्वा विहितं मृत्युं लोकतत्त्वविचक्षण:।
दिव्यान्यस्त्राण्यथोत्सृज्य रणे प्रायमुपाविशत्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
अपने दिव्य रूप मृत्युरूप धृष्टद्युम्न को अपने सम्मुख देखकर लोकतत्त्व के ज्ञान में निपुण आचार्य ने अपने दिव्यास्त्रों का परित्याग कर दिया और आमरण व्रत का नियम लेकर युद्धभूमि में बैठ गए ॥62॥
 
Seeing Dhrishtadyumna, his divinely ordained form of death, in front of him, the Acharya, adept in the knowledge of Loktattva, abandoned his divine weapons and took the rule of fasting unto death and sat on the battlefield. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)