श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.193.51 
अश्वत्थाम्नि हते नैष युध्येदिति मतिर्मम।
हतं तं संयुगे कश्चिदाख्यात्वस्मै मृषा नर:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
‘मेरा मानना ​​है कि अश्वत्थामा के मर जाने पर वे युद्ध नहीं कर सकते; इसलिए कोई उनसे झूठ बोलकर कहे कि ‘अश्वत्थामा युद्ध में मारा गया।’॥ 51॥
 
‘I believe that after the death of Ashwatthama, they cannot fight the war; therefore, someone should falsely tell them that ‘Ashwatthama was killed in the war.’॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)