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mahabharat 7.193.50: अतः हे पाण्डवों, तुम धर्म का विचार छोड़कर विजय प्राप्ति का प्रयत्न करो, जिससे स्वर्णमय रथधारी द्रोणाचार्य युद्धभूमि में तुम सबका वध न कर सकें।   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.193.50 
ते यूयं धर्ममुत्सृज्य जयं रक्षत पाण्डवा:।
यथा व: संयुगे सर्वान् न हन्याद् रुक्मवाहन:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
अतः हे पाण्डवों, तुम धर्म का विचार छोड़कर विजय प्राप्ति का प्रयत्न करो, जिससे स्वर्णमय रथधारी द्रोणाचार्य युद्धभूमि में तुम सबका वध न कर सकें।
 
Therefore, Pandavas, leaving aside the thoughts of Dharma, you should try to secure victory so that Dronacharya, who has the golden chariot, may not kill you all on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)