श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.193.5 
स तै: परिवृतो राजा त्रस्तै: क्षुद्रमृगैरिव।
अशक्नुवन्नवस्थातुमपायात् तनयस्तव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भयभीत मृगों के समान उन सैनिकों से घिरा हुआ आपका पुत्र राजा दुर्योधन वहाँ खड़ा न रह सका, वह भागकर अन्यत्र चला गया ॥5॥
 
Surrounded by those soldiers who were like frightened deer, your son King Duryodhana could not stand there. He fled away to some other place. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)