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mahabharat 7.193.44: जब सेनाएँ इस प्रकार कष्ट सहने लगीं, बहुत से राजा मरने लगे, तब पांचाल लोग क्रोध में भरकर युद्ध से विमुख हो गए ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.193.44 
क्लिश्यमानेषु सैन्येषु वध्यमानेषु राजसु।
अमर्षवशमापन्ना: पञ्चाला विमुखाऽभवन्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब सेनाएँ इस प्रकार कष्ट सहने लगीं, बहुत से राजा मरने लगे, तब पांचाल लोग क्रोध में भरकर युद्ध से विमुख हो गए ॥44॥
 
When the armies began to suffer in this manner, many kings began to die. Then the Panchalas, filled with resentment, turned away from the war. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)