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mahabharat 7.193.36: राजन! उस समय शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य बार-बार दुःखी होकर अपने पुत्र को द्रोणाचार्य के मारे जाने का समाचार सुनाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.193.36 
अथ शारद्वतो राजन्नार्तिमार्च्छन् पुन: पुन:।
शशंस द्रोणपुत्राय यथा द्रोणो निपातित:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य बार-बार दुःखी होकर अपने पुत्र को द्रोणाचार्य के मारे जाने का समाचार सुनाने लगे।
 
King! At that time Sharadvan's son Kripacharya, feeling pain again and again, began narrating to his son the news of how Dronacharya had been killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)