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mahabharat 7.193.3: उसकी चेतना लगभग लुप्त हो गई थी। आसक्ति के कारण उसका बल और पराक्रम नष्ट हो गया था। वह हतोत्साहित होकर आपके पुत्र को घेरकर खड़ा हो गया और अत्यंत दुःखी स्वर में विलाप करने लगा॥3॥   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.193.3 
विचेतसो हतोत्साहा: कश्मलाभिहतौजस:।
आर्तस्वरेण महता पुत्रं ते पर्यवारयन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उसकी चेतना लगभग लुप्त हो गई थी। आसक्ति के कारण उसका बल और पराक्रम नष्ट हो गया था। वह हतोत्साहित होकर आपके पुत्र को घेरकर खड़ा हो गया और अत्यंत दुःखी स्वर में विलाप करने लगा॥3॥
 
His consciousness had almost vanished. His power and strength had been destroyed due to attachment. He became demoralized and stood surrounding your son, wailing in a very sad voice.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)