श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.193.27 
हत्वा बहुविधा: सेना: पाण्डूनां युद्धदुर्मद:।
कथंचित् संकटान्मुक्तो मत्तद्विरदविक्रम:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वीर योद्धा अश्वत्थामा उन्मत्त हाथी के समान पाण्डवों की अनेक सेनाओं का संहार करके किसी प्रकार युद्ध के संकट से बच निकला।
 
The valiant warrior Ashvatthama, like a mad elephant, having destroyed several armies of the Pandavas, somehow escaped the trouble of war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)