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mahabharat 7.193.24: कुछ योद्धा दूसरों को रुकने को कहते, पर स्वयं नहीं रुकते। कई योद्धा बिना सारथी वाले रथों से सजे हुए घोड़ों को खोलकर उन पर सवार हो जाते और पैरों से उन्हें तेज़ी से हाँकने लगते।   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.193.24 
तिष्ठ तिष्ठेति न च ते स्वयं तत्रावतस्थिरे।
धुर्यानुन्मुच्य च रथाद्धतसूतात् स्वलंकृतान्।
अधिरुह्य हयान् योधा: क्षिप्रं पद्भिरचोदयन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कुछ योद्धा दूसरों को रुकने को कहते, पर स्वयं नहीं रुकते। कई योद्धा बिना सारथी वाले रथों से सजे हुए घोड़ों को खोलकर उन पर सवार हो जाते और पैरों से उन्हें तेज़ी से हाँकने लगते।
 
Some warriors would tell others to stop, but they themselves would not stop. Many warriors would untie the decorated horses from the chariots without charioteers, mount them and start driving them quickly with their feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)