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mahabharat 7.193.12: शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य को असंख्य ध्वजाओं और पताकाओं से सुशोभित बहुत-से सैनिकों ने घेर लिया। उनकी सेना के प्रमुख योद्धा मारे गए। वे भी 'हाय! यह बड़े दुःख की बात है, यह बड़े दुःख की बात है' कहते हुए युद्धभूमि से भाग गए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.193.12 
हतप्रवीरैर्भूयिष्ठैर्ध्वजैर्बहुपताकिभि:।
वृत: शारद्वतोऽगच्छत् कष्टं कष्टमिति ब्रुवन्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य को असंख्य ध्वजाओं और पताकाओं से सुशोभित बहुत-से सैनिकों ने घेर लिया। उनकी सेना के प्रमुख योद्धा मारे गए। वे भी 'हाय! यह बड़े दुःख की बात है, यह बड़े दुःख की बात है' कहते हुए युद्धभूमि से भाग गए॥12॥
 
Sharadvan's son Kripacharya was surrounded by a large number of soldiers adorned with numerous flags and banners. The leading warriors of his army were killed. They too fled from the battlefield saying, 'Alas! It is a matter of great sorrow, it is a matter of great sorrow.'॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)