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mahabharat 7.192.9-10h: वहाँ की भूमि टूटे हुए पहियों वाले रथों, गिरे हुए विशाल झण्डों और मारे गए वीर घुड़सवारों से ढकी हुई थी।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  7.192.9-10h 
भग्नचक्रै रथैश्चापि पातितैश्च महाध्वजै:॥ ९॥
सादिभिश्च हतै: शूरै: संकीर्णा वसुधाभवत्।
 
 
अनुवाद
वहाँ की भूमि टूटे हुए पहियों वाले रथों, गिरे हुए विशाल झण्डों और मारे गए वीर घुड़सवारों से ढकी हुई थी।
 
The ground there was covered with chariots with broken wheels, huge fallen flags and slain valiant horsemen. 9 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)