पाण्डवास्तु जयं लब्ध्वा हृष्टा ह्यासन् विशाम्पते।
अरिक्षयं च संग्रामे तेन ते सुखमाप्नुवन्॥ ८४॥
अनुवाद
हे प्रजानाथ! विजय प्राप्त करके पाण्डव हर्ष से भर गए। युद्ध में शत्रुओं के भीषण संहार से उन्हें अपार प्रसन्नता हुई। 84.
O Prajanath! The Pandavas were filled with joy after achieving victory. They got immense pleasure from the massive destruction of their enemies in the war. 84.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणवधपर्वणि द्रोणवधे द्विनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणवधपर्वमें द्रोणवधविषयक एक सौ बानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)