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mahabharat 7.192.8-9h: भारत! युद्धभूमि में जगह-जगह कटे हुए हाथ, सिर, धनुष, छत्र और पंखों के ढेर दिखाई दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.192.8-9h 
हस्तानामुत्तमाङ्गानां कार्मुकाणां च भारत।
छत्राणां चापविद्धानां चामराणां च संचयै:॥ ८॥
राशय: स्म व्यदृश्यन्त तत्र तत्र रणाजिरे।
 
 
अनुवाद
भारत! युद्धभूमि में जगह-जगह कटे हुए हाथ, सिर, धनुष, छत्र और पंखों के ढेर दिखाई दे रहे थे।
 
Bharat! The collections of severed hands, heads, bows, umbrellas and fans were visible in heaps in various parts of the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)