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mahabharat 7.192.78-79h: इस लोक में विजय और परलोक में महान यश प्राप्त करके पाण्डव अपने धनुषों पर बाण चलाने, शंख बजाने और बार-बार गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 78-79h
 
 
श्लोक  7.192.78-79h 
पाण्डवास्तु जयं लब्ध्वा परत्र च महद् यश:॥ ७८॥
बाणशङ्खरवांश्चक्रु: सिंहनादांश्च पुष्कलान्।
 
 
अनुवाद
इस लोक में विजय और परलोक में महान यश प्राप्त करके पाण्डव अपने धनुषों पर बाण चलाने, शंख बजाने और बार-बार गर्जना करने लगे।
 
After achieving victory in this world and great fame in the next, the Pandavas began to strum their bows with arrows, blow their conch shells and roar repeatedly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)