Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.192.76-77h: इस लोक में पराजित होकर और परलोक में महान भय का सामना करके, दोनों लोकों से वंचित होकर, वे अपने भीतर धैर्य नहीं रख सके। | mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पराजयमथावाप्य परत्र च महद् भयम्॥ ७६॥
उभयेनैव ते हीना नाविन्दन् धृतिमात्मन:।
अनुवाद
इस लोक में पराजित होकर और परलोक में महान भय का सामना करके, दोनों लोकों से वंचित होकर, वे अपने भीतर धैर्य नहीं रख सके।
Having been defeated in this world and having faced great fear in the next world, being deprived of both the worlds, they could not maintain patience within themselves. 76 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥