Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.192.72-73h: नरेश्वर! द्रोणाचार्य आकाश में पहुँचकर तारागण के मार्ग में प्रविष्ट हो गए। उस समय सत्यवतीनन्दन महर्षि श्रीकृष्णद्वैपायन की कृपा से मैंने द्रोणाचार्य की दिव्य मृत्यु का भी प्रत्यक्ष दर्शन किया। 72 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश्वर! द्रोणाचार्य आकाश में पहुँचकर तारागण के मार्ग में प्रविष्ट हो गए। उस समय सत्यवतीनन्दन महर्षि श्रीकृष्णद्वैपायन की कृपा से मैंने द्रोणाचार्य की दिव्य मृत्यु का भी प्रत्यक्ष दर्शन किया। 72 1/2॥
Nareshwar! Dronacharya reached the sky and entered the path of the stars. At that time, due to the blessings of Satyavatinandan Maharishi Shri Krishnadvaipayana, I also witnessed the divine death of Dronacharya directly. 72 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥