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mahabharat 7.192.71: महाराज! द्रोणाचार्य का कटा हुआ सिर देखकर आपके सभी सैनिकों में केवल भागने का उत्साह दिखा और वे सभी दिशाओं में भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  7.192.71 
ते तु दृष्ट्वा शिरो राजन् भारद्वाजस्य तावका:।
पलायनकृतोत्साहा दुद्रुवु: सर्वतो दिशम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! द्रोणाचार्य का कटा हुआ सिर देखकर आपके सभी सैनिकों में केवल भागने का उत्साह दिखा और वे सभी दिशाओं में भाग गए।
 
Maharaj! On seeing the severed head of Dronacharya, all your soldiers showed enthusiasm only in running away and they fled in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)