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mahabharat 7.192.7: जब राजाओं के बीच संघर्ष छिड़ गया, तो युद्धभूमि क्रूरता से भर गई। ठीक वैसे ही जैसे पूर्वकाल में (विनाश के समय) क्रुद्ध रुद्रदेव द्वारा पशुओं का वध किए जाने पर क्रूरता का दृश्य उपस्थित हुआ था।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  7.192.7 
क्रूरमायोधनं जज्ञे तस्मिन् राजसमागमे।
रुद्रस्येव हि क्रुद्धस्य निघ्नतस्तान् पशून् पुरा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब राजाओं के बीच संघर्ष छिड़ गया, तो युद्धभूमि क्रूरता से भर गई। ठीक वैसे ही जैसे पूर्वकाल में (विनाश के समय) क्रुद्ध रुद्रदेव द्वारा पशुओं का वध किए जाने पर क्रूरता का दृश्य उपस्थित हुआ था।
 
When the conflict between the kings broke out, the battlefield was filled with cruelty. Just as in the past (devastation) a scene of cruelty had appeared when the animals were being killed by the angry Rudra Deva. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)