श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 68-69h
 
 
श्लोक  7.192.68-69h 
शोणितेन परिक्लिन्नो रथाद् भूमिमथापतत्॥ ६८॥
लोहिताङ्ग इवादित्यो दुर्धर्ष: समपद्यत।
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य का रक्त से भीगा हुआ शरीर रथ से पृथ्वी पर गिर पड़ा, मानो लालिमायुक्त सूर्य अस्त हो गया हो ॥68 1/2॥
 
Dronacharya's body drenched in blood fell from the chariot on the earth, as if the red-glowing Sun had set. 68 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)