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mahabharat 7.192.6: उस महायुद्ध में दिव्यास्त्रों का उचित रीति से प्रयोग करके उन्होंने उन महाबुद्धिमान योद्धाओं द्वारा छोड़े गए अस्त्रों को निष्फल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.192.6 
तेषामस्त्राणि दिव्यानि संहितानि महात्मनाम्।
वारयामास विधिवद् दिव्यैरस्त्रैर्महामृधे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस महायुद्ध में दिव्यास्त्रों का उचित रीति से प्रयोग करके उन्होंने उन महाबुद्धिमान योद्धाओं द्वारा छोड़े गए अस्त्रों को निष्फल कर दिया।
 
By using the divine weapons in a proper manner in that great war, he nullified the weapons released by those great-minded warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)