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mahabharat 7.192.56-58h: उस समय मैं, कुन्ती पुत्र अर्जुन, शरद्वान पुत्र कृपाचार्य, वृष्णिपुत्र भगवान श्रीकृष्ण तथा धर्मपुत्र पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर- इन पाँचों ने ही योगज्ञ महात्मा द्रोण को परमधाम की ओर जाते हुए देखा।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 56-58h
 
 
श्लोक  7.192.56-58h 
वयमेव तदाद्राक्ष्म पञ्च मानुषयोनय:॥ ५६॥
योगयुक्तं महात्मानं गच्छन्तं परमां गतिम्।
अहं धनंजय: पार्थो कृप: शारद्वतस्तथा॥ ५७॥
वासुदेवश्च वार्ष्णेयो धर्मपुत्रश्च पाण्डव:।
 
 
अनुवाद
उस समय मैं, कुन्ती पुत्र अर्जुन, शरद्वान पुत्र कृपाचार्य, वृष्णिपुत्र भगवान श्रीकृष्ण तथा धर्मपुत्र पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर- इन पाँचों ने ही योगज्ञ महात्मा द्रोण को परमधाम की ओर जाते हुए देखा।
 
At that time, I, Kunti's son Arjun, Sharadvan's son Kripacharya, Vrishni's Lord Shri Krishna and Dharma's son Pandunandan Yudhishthir - these five people only saw the yogic Mahatma Drona going towards the supreme abode.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)