Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.192.55-56h: पलक झपकते ही वह प्रकाश आकाश में लुप्त हो गया। जब द्रोणाचार्य ब्रह्मलोक को चले गए और धृष्टद्युम्न अपमान से विचलित हो गए, तब हर्ष से भरे देवताओं का कोलाहल सुनाई देने लगा। | mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निमेषमात्रेण च तज्ज्योतिरन्तरधीयत।
आसीत् किलकिलाशब्द: प्रहृष्टानां दिवौकसाम्॥ ५५॥
ब्रह्मलोकगते द्रोणे धृष्टद्युम्ने च मोहिते।
अनुवाद
पलक झपकते ही वह प्रकाश आकाश में लुप्त हो गया। जब द्रोणाचार्य ब्रह्मलोक को चले गए और धृष्टद्युम्न अपमान से विचलित हो गए, तब हर्ष से भरे देवताओं का कोलाहल सुनाई देने लगा।
In the blink of an eye that light disappeared into the sky. When Dronacharya left for Brahmaloka and Dhrishtadyumna was disheartened by the insult, the uproar of the gods filled with joy could be heard. 55 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥