Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.192.50: उपर्युक्त कहकर महातपस्वी द्रोण ने योग का आश्रय लिया और ज्योतिस्वरूप परब्रह्म के साथ एकत्व का अनुभव करके मन में श्रेष्ठ पुराणपुरुष भगवान विष्णु का ध्यान करने लगे ॥50॥ | mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपर्युक्त कहकर महातपस्वी द्रोण ने योग का आश्रय लिया और ज्योतिस्वरूप परब्रह्म के साथ एकत्व का अनुभव करके मन में श्रेष्ठ पुराणपुरुष भगवान विष्णु का ध्यान करने लगे ॥50॥
Having said the above, that great ascetic Drona took refuge in Yoga and, experiencing the unity with Supreme Brahma in the form of light, started meditating in his mind on Lord Vishnu, the best Purana Purusha. 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥