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mahabharat 7.192.5: उन महारथियों के साथ युद्ध करते हुए शिनि के पौत्र सात्यकि ने अचानक अपने अस्त्रों से बाणों की उस भयंकर वर्षा को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.192.5 
तां वृष्टिं सहसा राजन्नुत्थितां घोररूपिणीम्।
वारयामास शैनेयो योधयंस्तान् महारथान्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उन महारथियों के साथ युद्ध करते हुए शिनि के पौत्र सात्यकि ने अचानक अपने अस्त्रों से बाणों की उस भयंकर वर्षा को रोक दिया।
 
While fighting with those mighty car-warriors, Satyaki, the grandson of Shini, suddenly stopped that fierce shower of arrows with his weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)