श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.192.49 
हाहाकारं भृशं चक्रुरहो धिगिति चाब्रुवन्।
द्रोणोऽपि शस्त्राण्युत्सृज्य परमं सांख्यमास्थित:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सब लोग बड़ा कोलाहल मचाकर कहने लगे, 'अहा! धिक्कार है, धिक्कार है।' इधर आचार्य द्रोण भी अपने शस्त्र त्यागकर परम ज्ञान को प्राप्त हो गए॥ 49॥
 
There everybody raised a huge hue and cry and started saying, 'Oh! Shame on you, shame on you'. Here Acharya Drona too abandoned his weapons and attained the state of supreme knowledge.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)