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mahabharat 7.192.48: उस स्थिति में द्रोणाचार्य को धृष्टद्युम्न के वश में पड़ता देख मनुष्य तथा अन्य प्राणी भी हाहाकार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.192.48 
हाहाकृतानि भूतानि मानुषाणीतराणि च।
द्रोणं तथागतं दृष्ट्वा धृष्टद्युम्नवशं गतम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उस स्थिति में द्रोणाचार्य को धृष्टद्युम्न के वश में पड़ता देख मनुष्य तथा अन्य प्राणी भी हाहाकार करने लगे।
 
In that situation, seeing Dronacharya falling under the control of Dhrishtadyumna, even humans and other creatures started wailing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)