Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.192.40: अपने एक पुत्र की जीविका चलाने के लिए तुमने गलत तरीकों का सहारा लिया और इस पापमय ज्ञान के द्वारा स्वधर्म परायण बहुत से क्षत्रियों का संहार किया, इससे तुम्हें लज्जा क्यों नहीं आती?॥40॥ | mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकस्यार्थे बहून् हत्वा पुत्रस्याधर्मविद्यया।
स्वकर्मस्थान् विकर्मस्थो न व्यपत्रपसे कथम्॥ ४०॥
अनुवाद
अपने एक पुत्र की जीविका चलाने के लिए तुमने गलत तरीकों का सहारा लिया और इस पापमय ज्ञान के द्वारा स्वधर्म परायण बहुत से क्षत्रियों का संहार किया, इससे तुम्हें लज्जा क्यों नहीं आती?॥40॥
How are you not ashamed of having resorted to wrong methods to earn a living for one of your sons and having killed many Kshatriyas, who were devoted to their own religion, through this sinful knowledge?॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥