श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.192.39 
श्वपाकवन्म्लेच्छगणान् हत्वा चान्यान् पृथग्विधान्।
अज्ञानान्मूढवद् ब्रह्मन् पुत्रदारधनेप्सया॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! ब्रह्मवेत्ता होकर भी तुमने मूर्ख चाण्डालों के समान स्त्री, धन और पुत्र के लोभ से बहुत से म्लेच्छों तथा नाना प्रकार के क्षत्रिय समूहों का संहार किया है॥39॥
 
Brahman! Despite being a Brahmaveta, you, like the foolish Chandalas, out of lust for women, wealth and sons, have killed many Mlechchas and other different types of Kshatriya groups. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)