श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.192.37 
यदि नाम न युध्येरन् शिक्षिता ब्रह्मबन्धव:।
स्वकर्मभिरसंतुष्टा न स्म क्षत्रं क्षयं व्रजेत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यदि शिक्षित ब्राह्मण अपने कर्मों से असंतुष्ट होकर अन्य धर्मों का सहारा लेकर युद्ध न करते, तो क्षत्रियों का यह नरसंहार न होता ॥37॥
 
If the educated Brahmins were dissatisfied with their deeds and had not resorted to other religions and started fighting, then this massacre of Kshatriyas would not have happened. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)