श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.192.36 
ततो भीमो दृढक्रोधो द्रोणस्याश्लिष्य तं रथम्।
शनकैरिव राजेन्द्र द्रोणं वचनमब्रवीत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
राजा ! तब क्रोध को दृढ़तापूर्वक धारण करने वाले भीमसेन द्रोणाचार्य के रथ के पास आए और उनसे धीरे से इस प्रकार बोले -॥36॥
 
King! Then Bhimasena, who had firmly maintained his anger, came close to the chariot of Dronacharya and spoke to him softly as follows -॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)