vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद
»
श्लोक 33
श्लोक
7.192.33
सवसातीञ्शिबींश्चैव बाह्लीकान् कौरवानपि।
रक्षिष्यमाणान् संग्रामे द्रोणं व्यधमदच्युत:॥ ३३॥
अनुवाद
कभी न डगमगाने वाले पांचाल योद्धा ने युद्ध में द्रोणाचार्य की रक्षा कर रहे बसति, शिबि, बहलिका और कौरव योद्धाओं को मार डाला।
The never-wavering Panchala warrior killed Basati, Shibi, Bahlika and the Kaurava warriors who were protecting Dronacharya in the battle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×