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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद
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श्लोक 32
श्लोक
7.192.32
स महास्त्रैर्महाराज द्रोणमाच्छादयद् रणे।
निहत्य सर्वाण्यस्त्राणि भारद्वाजस्य पार्षत:॥ ३२॥
अनुवाद
महाराज! धृष्टद्युम्न ने युद्धस्थल में द्रोणाचार्य के समस्त अस्त्र-शस्त्रों को नष्ट करके उन्हें अपने महान् अस्त्रों से ढक दिया।
Maharaj! Dhrishtadyumna destroyed all the weapons of Dronacharya on the battlefield and covered them with his great weapons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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