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mahabharat 7.192.31: युद्धभूमि में उपस्थित वे दोनों महारथी कुपित होकर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों और ब्रह्मास्त्रों का प्रदर्शन करने लगे और एक दूसरे को आगे बढ़ने से रोकने लगे॥31॥   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.192.31 
तौ न्यवारयतां श्रेष्ठौ संरब्धौ रणशोभिनौ।
उदीरयेतां ब्रह्माणि दिव्यान्यस्त्राण्यनेकश:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में उपस्थित वे दोनों महारथी कुपित होकर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों और ब्रह्मास्त्रों का प्रदर्शन करने लगे और एक दूसरे को आगे बढ़ने से रोकने लगे॥31॥
 
Those two great heroes who had graced the battlefield became enraged and displayed various types of divine weapons and Brahmastra and started stopping each other from moving forward. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)