स तथोक्तो महाबाहु: सर्वभारसहं धनु:।
अभिपत्याददे क्षिप्रमायुधप्रवरं दृढम्॥ २९॥
अनुवाद
भीमसेन के यह कहते ही महाबाहु धृष्टद्युम्न उछल पड़े और उन्होंने शीघ्रता से धनुष उठा लिया, जो कि सम्पूर्ण भार सहन करने में समर्थ एक शक्तिशाली तथा उत्तम अस्त्र था।
At Bhimasena's words, the mighty-armed Dhrishtadyumna jumped up and quickly picked up the bow, which was a strong and excellent weapon capable of bearing the entire weight.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)