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mahabharat 7.192.29: भीमसेन के यह कहते ही महाबाहु धृष्टद्युम्न उछल पड़े और उन्होंने शीघ्रता से धनुष उठा लिया, जो कि सम्पूर्ण भार सहन करने में समर्थ एक शक्तिशाली तथा उत्तम अस्त्र था।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.192.29 
स तथोक्तो महाबाहु: सर्वभारसहं धनु:।
अभिपत्याददे क्षिप्रमायुधप्रवरं दृढम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन के यह कहते ही महाबाहु धृष्टद्युम्न उछल पड़े और उन्होंने शीघ्रता से धनुष उठा लिया, जो कि सम्पूर्ण भार सहन करने में समर्थ एक शक्तिशाली तथा उत्तम अस्त्र था।
 
At Bhimasena's words, the mighty-armed Dhrishtadyumna jumped up and quickly picked up the bow, which was a strong and excellent weapon capable of bearing the entire weight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)