Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.192.26-27: पांचालराज धृष्टद्युम्न रथहीन हो गए थे। उनके समस्त अस्त्र-शस्त्र नष्ट हो गए थे और वे महान शोक में डूब गए थे। उस स्थिति में शत्रुओं के शत्रु पराक्रमी भीमसेन तुरंत ही उस महामनस्वी पांचालवीर के पास आए, उन्हें अपने रथ पर बिठाया और द्रोणाचार्य को निकट से बाण चलाते देखकर इस प्रकार बोले - 26-27॥ | mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पांचालराज धृष्टद्युम्न रथहीन हो गए थे। उनके समस्त अस्त्र-शस्त्र नष्ट हो गए थे और वे महान शोक में डूब गए थे। उस स्थिति में शत्रुओं के शत्रु पराक्रमी भीमसेन तुरंत ही उस महामनस्वी पांचालवीर के पास आए, उन्हें अपने रथ पर बिठाया और द्रोणाचार्य को निकट से बाण चलाते देखकर इस प्रकार बोले - 26-27॥
Panchala prince Dhrishtadyumna had become chariotless. All their weapons had been destroyed and they were plunged into great sadness. In that situation, the mighty Bhimsen, the enemy of the enemy, immediately came to that great-minded Panchalveer, seated him on his chariot, and seeing Dronacharya firing arrows from close range, said thus - 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥