श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  7.192.21-22 
विमनाश्चाभवद् युद्धे दृष्ट्वा पार्षतमग्रत:॥ २१॥
ऋषीणां ब्रह्मवादानां स्वर्गस्य गमनं प्रति।
सुयुद्धेन तत: प्राणानुत्स्रष्टुमुपचक्रमे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में अपने सम्मुख धृष्टद्युम्न को देखकर वह मन ही मन दुःखी हुआ और साथ ही ब्रह्मवादी महर्षियों द्वारा ब्रह्मलोक जाने के विषय में कहे गए वचनों का स्मरण करके उसने महान् युद्ध द्वारा प्राण त्यागने का विचार किया ॥21-22॥
 
He became sad in his heart after seeing Dhrishtadyumna in front of him in the battle. At the same time, remembering the words spoken by the Brahmavadi Maharishis regarding going to Brahmalok, he thought of sacrificing his life through a noble war. 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)