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mahabharat 7.192.20-21h: उस समय महारथी द्रोणाचार्य अपनी शक्ति खो रहे थे। उनकी बाईं आँख और बायाँ हाथ फड़क रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.192.20-21h 
हतौजा इव चाप्यासीद् भारद्वाजो महारथ:॥ २०॥
प्रास्फुरन्नयनं चास्य वामं बाहुस्तथैव च।
 
 
अनुवाद
उस समय महारथी द्रोणाचार्य अपनी शक्ति खो रहे थे। उनकी बाईं आँख और बायाँ हाथ फड़क रहे थे।
 
At that time, the great warrior Dronacharya was losing his energy. His left eye and left arm were twitching.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)