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mahabharat 7.192.2: माननीय महोदय, युद्धस्थल में कृपाचार्य, कर्ण और आपके पुत्र तुरन्त ही सात्यकि के पास पहुँचे और तीखे बाणों से उसे घायल करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.192.2 
कृपकर्णौ च समरे पुत्राश्च तव मारिष।
शैनेयं त्वरयाभ्येत्य विनिघ्नन् निशितै: शरै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
माननीय महोदय, युद्धस्थल में कृपाचार्य, कर्ण और आपके पुत्र तुरन्त ही सात्यकि के पास पहुँचे और तीखे बाणों से उसे घायल करने लगे।
 
Honorable Sir, in the battlefield, Krupacharya, Karna and your sons immediately reached Satyaki and began wounding him with sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)