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mahabharat 7.192.19-20h: हे महाराज! द्रोणाचार्य के अस्त्र-शस्त्र जलने लगे, रथ से घोर शब्द होने लगा और घोड़े आँसू बहाने लगे॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.192.19-20h 
जज्वलुश्चैव शस्त्राणि भारद्वाजस्य मारिष॥ १९॥
रथा: स्वनन्ति चात्यर्थं हयाश्चाश्रूण्यवासृजन्।
 
 
अनुवाद
हे महाराज! द्रोणाचार्य के अस्त्र-शस्त्र जलने लगे, रथ से घोर शब्द होने लगा और घोड़े आँसू बहाने लगे॥19 1/2॥
 
Honorable King! Dronacharya's weapons began to burn, a loud noise began to emanate from the chariot and the horses began to shed tears. ॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)