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mahabharat 7.192.16-17h: महायोद्धा द्रोणाचार्य ने प्राण त्यागने का संकल्प करके उन सभी आक्रमणकारियों का बड़े ही साहस के साथ सामना किया।   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.192.16-17h 
तान् समापतत: सर्वान् भारद्वाजो महारथ:॥ १६॥
अभ्यवर्तत वेगेन मर्तव्यमिति निश्चित:।
 
 
अनुवाद
महायोद्धा द्रोणाचार्य ने प्राण त्यागने का संकल्प करके उन सभी आक्रमणकारियों का बड़े ही साहस के साथ सामना किया।
 
The great warrior Dronacharya, having resolved to die, faced all those attackers with great vigour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)